Thursday, May 20, 2010

power cut

रात के अँधेरे ने एक बार फिर कल रात के पॉवर कट की याद दिला दी. इन दिनों रात की बिजली कटौती या फिर कहें की पॉवर कट एक आम बात हो गयी है. घड़ी की सुइयां जब थक कर आधी रात के वक़्त आराम की सोचती हैं तभी पॉवर कट हो जाता है. रात के समय पॉवर कट ठीक वैसा ही लगता है जैसे सालों बाद घर लौटे पिया से मिलने से पहले घर में बिन बुलाये मेहमानों का जमघट लग जाये. ऐसे एहसास से दिल्ली वाले अब तक़रीबन हर रात गुजर रहे हैं. लेकिन अपना दर्द किसे बताएं राजधानी निवासी होने के नाते पसीने का घूँट पीकर चुप रहना पड़ता है कि कहीं पडोसी राज्यों में रहने वाले परिचितों ने सुन लिया तो देश कि राजधानी में रहने की साडी अकड़ निकल जाएगी. बस इतना ही कहना चाहता हूँ. शब्बा खेर doston

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